[dehradun] - शिक्षा को समयानुकूल बनाने के लिए नवाचार जरूरी

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ब्यूरो/अमर उजाला/विकासनगर।

समग्र शिक्षा अभियान के तहत शिक्षकों के 10 दिवसीय प्रशिक्षण के अंतिम चरण की शुरुआत बृहस्पतिवार को ब्लॉक संसाधन केंद्र पर हुई। प्रशिक्षण शिविर में शिक्षकों को शिक्षा में नई तकनीक का उपयोग करने के गुर बताए गए।

कोर्डिनेटर प्रकाश चौहान ने बताया कि व्यक्ति और समाज में हो रहे परिवर्तनों का प्रभाव शिक्षा पर भी पड़ा है। शिक्षा को समयानुकूल बनाने के लिए शैक्षिक विधाओं में नवाचार जरूरी है। शैक्षिक नवाचारों का उद्भव स्वत: नहीं होता बल्कि उन्हें शिक्षक को स्वयं खोज कर सुनियोजित तरीके से प्रयोग में लाना होता है।

उन्होंने कहा कि तनाव रहित माहौल बनाने के लिए जरूरी है कि शिक्षणेत्तर गतिविधियों का आयोजन किया जाए। मानवीय प्रवृत्ति होती है कि व्यक्ति एक ही स्थान और एक ही कार्य में नीरसता महसूस करता है। छात्र भी इस प्रवृत्ति से अछूते नहीं रहते हैं। लिहाजा उन्हें शैक्षणिक भ्रमण के माध्यम से बाहरी परिवेश की जानकारी मुहैया कराई जानी चाहिए। नोडल अधिकारी प्रधानाचार्य आरसी कांडपाल ने बताया कि 10 दिनों तक चलने वाले प्रशिक्षण के तहत शिक्षकों को हिंदी, सामाजिक विज्ञान व गणित विषय में शिक्षण, वर्तमान दौर में बदलाव, शिक्षक का कक्षा, विषय व छात्र के प्रति व्यवहार की विस्तार से जानकारी मुहैया कराई जाएगी। इस अवसर पर शिखा रानी, देवेंद्र दत्त, सतीश चंद्र, सत्यपाल तोमर, गुलाब सिंह, गोपाल तोमर, वैजयंती, महेंद्र पाल, राजकुमार, उमा नैनवाल, अंजू जोशी, डॉ. रत्ना मिश्रा आदि मौजूद रहीं।

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