[gwalior] - रिफअत साहब ने शायरी के दम पर ग्वालियर की सरहद से निकल दुनिया में बनाई पहचान

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ग्वालियर. देश के नामचीन शायरों में से एक नसीम रिफअत साहब से मेरी मुलाकात कुछ समय पहले रेडियो पर एक रिकॉर्डिंग के दौरान हुई थी। तब मुझे कतई इल्म नहीं था कि नसीम साहब से यह आखिरी मुलाकात होगी। आज वह खामोशी के साथ अनंत यात्रा पर निकल गए, लेकिन उनकी लिखी गजलें जब तक गुनगुनाई जाती रहेंगी, वे हमारे साथ हमेशा जिंदा रहेंगे।

नसीम रिफअत साहब का शुमार ग्वालियर के उन शायरों में होता है, जिन्होंने अपनी शायरी के हवाले से ग्वालियर की सरहदों से आगे निकलकर देश-दुनिया में अपनी पहचान बनाई। गजल की रवायत एक दूसरे से प्रेम करना सिखाती है। पूरी इंसानियत के लिए अमन का पैगाम देती है और इंसान दोस्ती का मकसद लेकर आगे बढ़ती है। नसीम साहब गजल की इसी रवायत के साथ दामन को थामे हुए हमेशा आगे बढ़ते रहे। सादा जबान में दिल को छू लेने वाले शेर उन्होंने कहे, जो आम पढऩे सुनने वालों के साथ-साथ खास लोगों के दिलों में भी अपनी जगह बनाते हैं। देश के कई चुनिंदा गायकों ने उनकी गजल को अपनी आवाज दी है। गजल जब किसी पुरकशस अवाज में ढलकर सुनने वालों के सामने आती है, तो एक रूप धर लेती है। वो रूप जो हर सुनने वाले उसे अपने एेतबार से देखता है। नसीम साहब इस हवाले से बहुत मकबूल हुए। उन्होंने कई म्यूजिक कम्पनियों के लिए गीत लिखे और कव्वालियां भी लिखीं। जो वक्त-वक्त पर उनके चाहने वालों के बीच आती रहीं। उनके शागिर्दों की एक अच्छी खासी तादाद है, जो उनकी शायरी की रवायत को आगे बढ़ा रहे हैं और बढ़ाते रहेंगे। रिफअत साहब का काम काफी कुछ प्रकाशित हो चुका है। इसके अलावा उनकी कई रचनाएं गाने वालों के हवाले से मौजूद हैं। वे हमेशा अपने चाहने वालों के बीच...

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