[hamirpur-hp] - स्टेशनरी खरीद मामले की जांच ठंडे बस्ते में

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हमीरपुर। जिला हमीरपुर सर्व शिक्षा एवं राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत स्टेशनरी खरीद घोटाले की जांच आगे नहीं बढ़ पाई है। शिकायत के तीन हफ्ते बाद भी इस मामले की जांच अधूरी है। जिससे डाइट गौना करौर के प्रधानाचार्य एवं एसएसए के परियोजना अधिकारी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। इस गड़बड़ी की जांच किसी बाहरी एजेंसी से करवाने के बजाय डाइट के ही एक प्राध्यापक और लेखाकार के माध्यम से करवाई जा रही है। जिससे इस जांच की निष्पक्षता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

डाइट गौना करौर में करीब दस महीने तक दो प्रधानाचार्यों के बीच कुर्सी को लेकर युद्ध चलता रहा है। एक कुर्सी पर दो अधिकारियों की नियुक्ति का मामला प्रशासनिक ट्रिब्यूनल, प्रदेश हाईकोर्ट से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा था। नए प्रधानाचार्य की नियुक्ति के बाद संस्थान में विकासात्मक कार्यों में तेजी और भ्रष्टाचार पर अंकुश की उम्मीद जगी थी। लेकिन, स्टेशनरी बिल गड़बड़ी की ठप पड़ी जांच ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि इस मामले की शिकायत शीघ्र विजिलेंस और सीआईडी में भी करने की तैयारी हो गई है। जिससे आने वाले समय में घोटाले में संलिप्त अधिकारियों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। सरकारी स्कूलों के अध्यापकों के लिए एसएसए और आरएमएसए के तहत दो माह पूर्व आयोजित सेमिनार में सरकारी धनराशि का गोलमाल सामने आया था। पांच रुपये के बॉल पेन का सरकारी बिल में रेट सात रुपये और दस रुपये के कांफ्रेंस पेड का बिल 13 रुपये बनाकर सरकारी राशि का गबन हुआ है। ‘अमर उजाला’ ने अपने 30 जनवरी के अंक में इस मामले को प्रमुखता से उठाया था। जिसके बाद निदेशक ने इस मामले की जांच के निर्देश दिए थे। लेकिन, अभी तक जांच कंपलीट नहीं हुई। उधर, डाइट गौना करौर के प्रधानाचार्य राजेंद्र पाल का कहना है कि मामले की जांच चल रही है। इसके लिए डाइट के लेखाकार को नियुक्ति किया गया है।

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