[jodhpur] - खरीफ प्याज प्रक्षेत्र दिवस कार्यक्रम आयोजित

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कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. महेन्द्र सिंह चांदावत ने कहा कि किसानों को अधिक उपज देने वाली किस्मों का उपयोग करना चाहिए। उद्यान विशेषज्ञ डॉ. कामिनी पाराशर ने बताया कि खेतों पर खरीफ में प्याज की एल-883 किस्म लगाई गई थी। जिसके आशाजनक परिणाम मिले है। उन्होंने बताया कि प्याज की यह किस्म खरीफ के मौसम में उपयुक्त है तथा इस प्रजाति के प्याज के शल्क कंद गहरे लाल रंग के गोलाकार होते है। साथ ही मध्यम तीखापन होता है। फसल रोपाई के 90-100 दिन में तैयार हो जाती है तथा किसान दिसम्बर - जनवरी माह में प्याज की उपलब्धता को बनाए रखने के साथ ही अच्छी आय अर्जित कर सकते है। फलोदी व आस-पास के क्षेत्र में अधिकांश प्याज की फसल रबी में उगाते है तथा अप्रेल में फसल तैयार होती है। इस समय बाजार में अधिक मात्रा में प्याज की आवक होती है। जिससे भण्डारण की व्यवस्था के अभाव में किसानों को सस्ते भाव में प्याज बेचना पड़ता है। पौध संरक्षण विशेषज्ञ डॉ. गजानंद नागल ने बताया कि जैव नियंत्रक, जैव कीटनाशी, शस्य विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. मनमोहन पूनिया ने प्याज की नर्सरी तैयार करने, उर्वरक, खपतवार नियंत्रण, सिंचाई प्रबंधन की जानकारी दी। इस अवसर पर दौलतङ्क्षसह, उत्तमाराम, भीखसिंह, लैब तकनीशियन भागचंद ओला आदि उपस्थित रहे।

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