[mungeli] - मध्याह्न भोजन में पौष्टिकता तो दूर अब पेट भरने पर भी आफत

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लोरमी. क्षेत्र के अधिकांश स्कूलों में मध्याह्न भोजन ब्यवस्था का हाल बेहाल है। मीनू के अनुसार न तो बच्चों को भोजन मिल रहा है और न ही स्वादानुसार भोजन की ब्यवस्था हो पा रही है। समूह के माध्यम से संचालित मध्यान्ह भोजन सिर्फ दाल भात तक सिमट कर रह गया है। बच्चों को न तो पौष्टिकता वाली हरी-हरी सब्जियां ही मिलती है न तो किसी प्रकार का मिष्ठान।

विकासखण्ड के युक्तियुकरण के बाद 267 प्र्रामरी स्कूल व 108 मिडील स्कूल मेंमध्याह्न भोजन संचालित है।मध्याह्न भोजन में शासन ने नियम बनाये है कि बच्ंचो को दिनवार भोजन दे सकें। लेकिन दिनवार भोजन तो दूर उन्हें ठीक ढ़ंग से दाल भात भी नहीं मिल रहा है।मध्याह्न भोजन बांटने वाले समूह व प्रधान पाठको की मिलीभगत से बच्चों को न तो गुणवत्तायुक्त भोजन मिल रहा है और न ही उनके सेहत का ख्याल रखा जा रहा है। ठंडी के मौसम में भी जैसा चाहे वैसा सब्जी बच्चो को परोसा जा रहा है। वहीं अधिकांश जगहों पर लकड़ी से खाना बनाया जा रहा है। जबकि शासन ने गैस सिलेंडर दिया हुआ है। अधिकांश स्कूलों से सिलेंडर भी गायब हो गया है।...

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