[neemuch] - Farmer News अफीम फसल हंकवाने के सिवाय नहीं कोई अन्य रास्ता

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नीमच. बुधवार को हुई ओलावृष्टि की वजह से जिले में धनिया को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा है। इसके अतिरिक्त चना, संतरा, इसबगोल और सरसों की फसल प्रभावित हुई है। अफीम फसल को हुए नुकसान के सर्वे का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में किसानों के सामने एकमात्र विकल्प है फसल हंकवाई का। जो किसान अफीम की प्रभावित फसल नहीं हंकवाते हैं वे औसत को लेकर चिंतित हैं।

5 मार्च तक कर सकते हैं फसल हंकवाने का आवेदन

केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो द्वारा जिले में अफीम काश्तकारों को 10 आरी तक के पट्टे दिए गए हैं। गुरुवार शाम को हुई ओलावृष्टि और बारिश की वजह से अफीम फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। ओलावृष्टि की वजह से अफीम फसल के डोडे टूटकर गिर गए हैं। कुछ किसानों के खेत में खड़ी फसल लेट गई। इस कारण उनकी चिंता काफी बढ़ गई है। उपनारकोटिक्स आयुक्त प्रमोद सिंह ने बताया कि अफीम की खेती किसान अपनी रिक्स पर करते हैं। विभाग की ओर से किसी प्रकार के सर्वे या नुकसान होने पर मुआवजे का प्रावधान नहीं है। अफीम नीति में जो तय हो जाता है उस अनुसार की किसानों नारकोटिक्स विभाग को अफीम उत्पादन कर जमा कराता है। बुधवार को नीमच जिले के कुछ क्षेत्रों में ओलावृष्टि और बारिश से अफीम फसल को नुकसान होने की जानकारी मिली है। जिन किसानों की अफीम की फसल प्रभावित हुई है वे 5 मार्च में फसल हंकवाने का आवेदन दे सकते हैं। इस बारे में किसानों को सूचना भी दी जा चुकी है।...

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