[neemuch] - video दो साल बिस्तर पर रहने के बाद अब चलने लगा अजहर

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नीमच. यहां के 23 वर्षीय इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर अजहर खान जो को नयाजीवन मिला है। एक हादसे की वजह से अजहर करीब 2 साल तक व्हीलचेयर पर रहे। बिस्तर से उठना तक मुश्किल हो गया था। चलने की तो मानो कल्पना ही नहीं थी। स्टेमसेल थेरेपी सहपुनर्वास के बाद अब अजहर चलने में सक्षम हो गए हैं।

दीवार गिरने से मलबे के नीचे दब गए थे

न्यूरोजेन ब्रेन एंड स्पाइन इंस्टीट्यूट मुम्बई की उपनिदेशक और चिकित्सा सेवा प्रमुख डा. नंदिनी गोकुलचंद्रन ने बताया कि नीमच के अजहर खान को बिस्तर से उठाकर चलने लायक बनाकर हमने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। चिकित्सकों ने उसे मना कर दिया था कि उसकी बीमारी ठीक ही नहीं होगी। 23 वर्षीय इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर अजहर खान 6 अप्रैल 2016 की रात भारी वर्षा के दौरान दीवार गिरने से मलबे के नीचे दब गए थे। उनकी रीढ़ में डी-12, एल-1 स्तर पर चोट पहुंची। उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 2 से 3 दिनों के भीतर स्पाइन फिक्सेशन सर्जरी की गई। विभिन्न प्रकार की दवाओं के साथ ही सामान्य एक्सरसाइज भी कराई गई। हालांकि इससे उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। अजहर और उनके परिवार के लोगों को पूर्व में अपना इलाज करा चुके एक व्यक्ति से न्यूरोजेन ब्रेन ऐंड स्पाइन इंस्टीट्यूट के बारे में जानकारी मिली। बिना समय बर्बाद किए अजहर के परिवारवालों ने ऑनलाइन परामर्श किया और जुलाई 2017 के दौरान एनआरआरटी (न्यूरो रीजनरेशन रिहेबिलिटेशन थेरेपी) के लिए न्यूरोजेन बीएसआई पहुंचे। जांच में पाया गया था कि अजहर बिस्तर पर गतिशीलता के दौरान उसका धड़ पर नियंत्रण बहुत खराब था। पीठ का सहारा लिए बिना शर्ट पहनने जैसे कार्य में भी कठिनाई महसूस होती थी। खड़े होने पर चक्कर आते थे। 15-20 मिनट से ज्यादा खड़ा रह पाने में मुश्किल होती थी। रोजमर्रा की गतिविधियों को करने में कठिनाई महसूस होती थी। कमर से नीचे के हिस्से में स्पर्श या दबाव महसूस नहीं होता था। मूत्राशय और आंत्र नियंत्रण नदारद था, तो वहीं किसी तरह की संवेदना महसूस नहीं होती थी। न्यूरोजेन में अजहर को एक सप्ताह के लिए एनआरआरटी दी गई। उन्हें अनुभवी फिजियोथेरेपिस्ट, ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट, मनोवैज्ञानिक काउंसिलर्स इत्यादि द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। उपचार के बाद घर लौटने पर अजहर ने नियमित रूप से पुनर्वास प्रक्रिया का पालन जारी रखा। अजहर ने बताया कि इतने सारे उपचार करने के बाद पहली बार मैंने खुद को सुधार के रास्ते पर पाया है। अब मैं वॉकर के सहारे चलने लगा हूं। पहले पूरी तरह माता-पिता पर आश्रित था। मुझे डाक्टरों ने मना कर दिया था कि तुम्हारी बीमारी को कोई इलाज नहीं है। अब मुम्बई में इलाज कराने के बाद काफी अच्छा महसूस कर रहा हूं। अब मैं धीरे धीरे स्वयं के काम भी करने लगा हूं। अब मैं घर पर ही टीवी अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण ठीक करने का काम करने लगा हूं। दीवार गिरने से मुझे शारीरिक नुकसान हुआ था इसकी के लिए शासन प्रशासन की ओर से बड़ी मदद नहीं मिली। मात्र 12 हजार 500 हजार रुपए मिले थे। मुझे पहले मुम्बई के इस अस्पताल की जानकारी मिल जाती तो दो साल पहले ही ठीक हो जाता।

फोटो - http://v.duta.us/3vM42gAA

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