[rajsamand] - 12 फरवरी को ही राजस्थान के इस सपूत ने ज्वॉइन की थी ड्यूटी, आखिरी बार दोस्त की शादी में शरीक होने आए थे गांव

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राजसमंद।

जम्मू-कश्मीर के पुलमावां में हुए आतंकी हमले में शहीद हुए राजसमंद के लाल के बलिदान पर गांव वालों की छाती गर्व से तो फूल गई है लेकिन लोगों में गम के साथ जबरदस्त गुस्सा भी है। राजसमंद जिले के बिनोल गांव में 38 साल के शहीद नारायण लाल की बहादुरी के किस्से हर बच्चे से लेकर बुजुर्गों तक की जुबां पर सुनाई दे रहे हैं। पूरा गांव अपने इस देशभक्त बेटे को आखिरी बार देखने को बेताब है। शहीद के परिजनों के अनुसार नारायण सप्ताहभर की छुट्टियां पूरी कर मंगलवार को ही गांव से ड्यूटी के लिए रवाना हुए थे। शहीद नारायण लाल के परिवार में माता-पिता का देहांत हो चुका है। पत्नी मोहनी देवी (36), पुत्री हेमलता (17) और पुत्र मुकेश (11) हैं। एक भाई गोवद्र्धन लाल, काका रामलाल गुर्जर के अलावा अन्य रिश्तेदार हैं।...

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