[uttarakhand] - कब तक बच्चे बेमौत मारे जाते रहेंगे? पूछ रही है एक शहीद की मां

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पुलवामा में सीआरपीएफ़ के काफ़िले पर आतंकी हमले के बाद देश भर में आतंकवाद और आतंकियों को पनाह देने वाले पाकिस्तान के खिलाफ देश भर में आक्रोश पनप रहा है. सैनिकों के प्रदेश उत्तराखंड ने पहले भी कश्मीर में आतंकवादियों के हाथों अपने लाल खोए हैं. इन्हीं में से एक थे अगस्त 2018 में जम्मू-कश्मीर के बांदीपुरा सेक्टर में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हुए मनदीप सिंह रावत. गुरुवार के आतंकी हमले ने शहीद मनदीप के परिजनों को उनकी शहादत की याद दिला दी.

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गढ़वाल के प्रवेशद्वार पौड़ी के कोटद्वार में रहने वाले शहीद मंदीप सिंह रावत के परिवार का कहना है कि आतंकियों के हौसले बुलंद हो चले हैं. सरकार को आतंकवादियों को मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए. शहीद मंदीप सिंह के पिता एक रिटायर्ड फौजी हैं, वह तो किसी तरह खुद को संभाल लेते हैं लेकिन बेटे को याद कर मां की आंखें भर आती हैं....

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