[varanasi] - कानूनी अधिकार तय किए बिना नहीं हो सकता ध्वस्तीकरण

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प्रयागराज। हाईकोर्ट ने कहा है कि मास्टर प्लान के तहत सड़कों को चौड़ा करने के लिए भवनों के ध्वस्तीकरण से पूर्व भवन स्वामी का कानूनी अधिकार तय करना जरूरी है। अवैध निर्माण या अअितक्रमण को हटाने से पहले पूर्व की सूचना देना और आपत्तियों पर विचार करना आवश्यक है। ऐसा किए बिना ध्वस्तीकरण नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा है कि ध्वस्तीकरण से पहले सरकार हिंदी और अंग्रेजी के अखबारों में इसकी सूचना प्रकाशित करे और आपत्तियों का निस्तारण करे।

अवैध निर्माण या अतिक्रमण सरकारी जमीन पर है या निजी भूमि पर यह तय किया जाना जरूरी है। यदि निर्माण अवैध नहीं है तो सरकार भूमि अधिग्रहीत कर मुआवजा देने के बाद ध्वस्तीकरण कर सकती है। सिर्फ शासनादेश जारी कर किसी की भूमि नहीं ली जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 300 (ए) के तहत किसी भी नागरिक को बगैर कानूनी प्रक्रिया अपनाए संपत्ति के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है। वाराणसी लहरतारा के राय अजय कुमार और 15 अन्य की याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल और न्यायमूर्ति वीपी वैश की पीठ ने दिया। कोर्ट ने कहा कि सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रहे याची के मकान का ध्वस्तीकरण उसकी आपत्ति को सुनकर किया जाए।...

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