[dindori] - भगवान के सामने नहीं टिक सकता पाप: आचार्य

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डिंडोरी. नगर के उत्तरी तट में माँ नर्मदा की गोद मे चल रही शिवपुराण की कथा में वृन्दावन से पधारे आचार्य सतीश ने सती चरित्र और कुबेर के जन्म की कथा सुनाई । जिसमे भगवान शंकर के प्रसाद की महिमा बताई। कहा बड़े से बड़ा पाप और पापी अगर भगवान शंकर का प्रसाद पा लेता है तो उसके सब पाप समाप्त हो जाते है।

उन्होंने गुणनिधि पापी कथा सुनाई जिसने भोलेनाथ के प्रसाद को पाकर परमपद को प्राप्त किया। जो भक्त भगवान के मंदिर में प्रतिदिन दीपक जलाता है तो उसके जीवन का अंधेरे समाप्त हो जाते है। जिसका हृदय पवित्र होता है भगवान उसके ही ह्रदय में निवास करते है और ह्रदय को पवित्र करने के लिए भगवान का भजन करना चाहिये। शिव नाम की महिमा बताते हुए कहा कि जो भी भगवान का नाम भाव से कुभाव से जैसे भी लेता है उसका कल्याण हो जाता है बड़े से बड़ा पाप भगवान के एक नाम के सामने टिक नही सकता। आगे आचार्य ने बताया कि भगवान शंकर अपने तन पर भस्म क्यो लगाते है। भगवान शिव एक ऐसे देवता हैं जो भक्तों की सच्ची श्रद्धा और आस्था देकर उन पर इतने अधिक प्रसन्न हो जाते हैं कि उनका जीवन खुशियों से भर देते हैं। गृहस्थ होते हुए भी भगवान शिव ने संसार से विरक्त होकर वैराग्य को धारण किया। समस्त संसार के प्राणियों को धन-धान्य, सुख-संपत्ति प्रदान करने और संसार के संहारक की भूमिका निभाने वाले भगवान शिव स्वयं अपने हाथों में त्रिशूल धारण करते हैं, भांग-धतूरे का सेवन करते हैं. अपने गले में सर्प को धारण करते हैं और तो और वो अपने पूरे शरीर पर भस्म लगाते हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे व कथा का श्रवण किया। आज शिव पार्वती विवाह, शंखचूर्ण एवं जालंधर उद्धार, वाणा सुरोपख्यान का वर्णन किया जायेगा।...

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