[sikar] - बेरोजगारी भत्ते के नाम पर धोखा

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जोगेंद्र सिंह गौड़

सीकर. बेरोजगारी भत्ते के नाम पर युवाओं के साथ धोखा हो रहा है। बानगी यह है कि सरकार जिले के चार हजार से अधिक युवाओं को रोजगार तो दे नहीं पाई। कइयों को नाम मात्र का मिल रहा भत्ता भी बंद कर दिया गया है। क्योंकि आचार संहिता के कारण फार्म रिन्यू नहीं हुए। अब पोर्टल हैंग होने से अपुर्वल अटकी पड़ी है।

जानकारी के अनुसार नई सरकार के वादे से हजारों बेरोजगारों को रोजगार की आस बंधी थी। लेकिन, स्थिति इसके उल्टी बनी हुई है। बेरोजगार युवाओं को प्रतिमाह मिलने वाले रोजगार भत्ते से भी हाथ धोना पड़ गया है। दरअसल ३० वर्ष तक के बेरोजगारों को दो साल तक प्रतिमाह मिलने वाले भत्ते के आवेदन फार्म का नवीनीकृत कराना होता है। लेकिन, चुनाव के दौरान आचार संहिता लग जाने पर आवेदन फार्म बंद कर दिए गए थे। इसी असमंजस में कई बेरोजगार फार्म रिन्यू नहीं करवा पाए। कई महीनों का रोजगार भत्ता नहीं मिलने पर जब युवाओं ने रोजगार कार्यालय में पूछताछ की तो पता चला कि उन्हें बेरोजगारी भत्ते के लिए अयोग्य बता दिया है। राजस्थान पत्रिका ने जब पड़ताल की तो रोजगार कार्यालय में बैठी महिला कार्मिकों ने बताया कि पहले के आवेदनों के बाद पोर्टल बंद पड़ा है। करीब चार हजार से अधिक आवेदनों की अपूर्वल नहीं हो पाई है। जबकि मुख्यालय तक कई बार मेल भिजवाई जा चुकी है। जनरल ओबीसी व एसीएसटी के कुछ बेरोजगारों का भत्ता देने का प्रयास है। लेकिन, बजट के अभाव ने सिरदर्दी बढ़ा रखी है। विभाग के पास आठ हजार बेरोजगार रजिस्टर्ड हैं। एक्सपर्ट गौरव के अनुसार खुद रिन्यू करने की प्रक्रिया का वीडियो उपलोड किया हुआ है।...

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