[sikar] - मन की आंखों से पढ़ लेती है शालिनी

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सीकर. नेत्रहीन शालिनी को दोनों आंख नहीं देकर भले ही ऊपर वाले ने उसके जीवन में अंधेरा भर दिया हो। लेकिन, राज्य स्तरीय ब्रांड एंबेसेडर चयनित होने के बाद दृष्टिहीन शालिनी अब उन जरूरतमंद बेटियों के भविष्य को रोशन कर सकेगी। जो किसी कारणवश स्कूल नहीं जा पा रही है या फिर दूसरी मजबूरियों के तहत जिन्होंने शिक्षा से नाता तोड़ लिया है। जी हां, पिपराली रोड पर रहने वाली १५ वर्षीय शालिनी चौधरी को वीमन ऑफ द फ्यूचर अवार्ड का ब्रांड एंबेसेडर बनाया गया है। जिसके तहत शालिनी अपनी उन हमउम्र बालिकाओं को प्रोत्साहित कर आगे लाएगी। जिन्होंने बाल विवाह या आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण स्कूल जाना छोड़ रखा है। क्योंकि शालिनी खुद देख नहीं पाती है। बावजूद इसके शालिनी ने सामान्य वर्ग के बच्चों के साथ पढ़ाई की और कक्षा में टॉप रही। इसके अलावा स्टेट पैरालंपिक की दौड़ में शामिल होकर गोल्ड मेडल हासिल किया। बकौल शालिनी का मानना है कि कमजोर वे होते हैं। जिनका शरीर स्वस्थ होने के बावजूद उनमें जोश और जूनून का अभाव होता है। क्योंकि मंजिल पाने के लिए आंखों से ज्यादा आत्म विश्वास होना जरूरी है। एेसे में उसका प्रयास रहेगा कि फील्ड से ज्यादा से ज्यादा उन बहनों को जोड़ पाऊं। जिनका भविष्य बगैर शिक्षा के अंधकारमय बना हुआ है।...

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