[varanasi] - रंग महोत्सव के मंच पर जीवंत हुई अमली

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वाराणसी। अमली का पति कोलकाता में कमाता है। गांव के दबंग महादेव राय की बुरी नजर अमली पर है। गरीबी के कारण अमली महादेव से कर्ज लेने जाती है। कर्ज के बदले में अबरार खां अमली की जमीन भी धोखे से अपने नाम करा लेता है। अब अमली को गांव से निकालने की तैयारी की जा रही है। अकेली महिला के अंतरद्वंदों को अमली ने बखूबी जिया। भोजपुरी और बघेली भाषा में अमली के मंचन ने दर्शकों को भी सोचने पर विवश कर दिया।

नागरी नाटक मंडली में गुरुवार को राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की ओर से 20वें भारत रंग महोत्सव की शुरुआत हुई। सात दिनों तक चलने वाले थिएटर फेस्टिवल की पहली प्रस्तुति अमली ने दर्शकों को अंत तक कुर्सी से बांधे रखा। अमली की भूमिका में वीना शर्मा और महादेव राय की भूमिका में प्रदीप कटारिया ने अपने अभिनय की अमिट छाप छोड़ी। अमली का लेखन ऋषिकेश सुलभ और निर्देशन सुशील शर्मा का रहा। गुरुवार को महोत्सव का उद्घाटन करते हुए हुए पद्मश्री प्रो. राजेश्वर आचार्य ने कहा कि, मैं 20वें भारत रंग महोत्सव के सह-मेजबान के रूप में वाराणसी का चुनाव करने के लिए राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय को धन्यवाद देना चाहूंगा। साथ ही, मैं राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय नाटकों की शानदार शृंखला लाने के लिए संस्था को भी धन्यवाद देना चाहूंगा। संयुक्त सचिव निरुपमा कोटरू ने कहा कि भारत रंग महोत्सव ने अपने 20वें संस्करण में प्रवेश किया है। अपनी स्थापना के बाद से, यह त्योहार हमेशा दुनिया भर के राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय थिएटर कलाकारों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के प्रभारी निर्देशक सुरेश शर्मा अतिथियो का स्वागत किया। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) सोसायटी के एक्टिंग चेयरमैन डॉ. अर्जुन देव चारण ने कहा कि थिएटर हमारे जीवन का हिस्सा है। बावजूद इसके आज भी हम इसके प्रोत्साहन के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

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