[bassi] - होलिका दहन आज, रंगों से सजे बाजार, उल्लास के रंगों से कल मनाएंगे धुलंडी

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होली आज धुलण्डी कल : बाजारों में सजी रंग-गुलाल की दुकानें

फाल्गुन की मस्ती अब दो दिन के त्योहार पर सिमटी

शाहपुरा/राड़ावास. कुछ दशक पहले तक फाल्गुन माह में कस्बे सहित ग्रामीण अंचल में होली का खूब धमाल मचता था, लेकिन वर्तमान में इस भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच त्योहार का उल्लास वैसा नहीं है। पूरे फाल्गुन माह की मस्ती अब तो महज होली-धुलण्डी के दिन तक ही सिमटकर रह गई है। अब चंग की ढाप व पुराने खेलों की जगह मोबाइल ने ले ली है।

पहले होली का डांडा रुपते ही ग्रामीण फागोत्सव की तैयारियों में जुट जाते थे। आधुनिकता के रंग में होली का वास्तविक रंग गायब सा हो गया है। बुजुर्ग सूवालाल बराला व बंशीधर बोबास्या ने बताया कि पहले होली के एक माह पहले से ही लोग फाग उत्सव की तैयारियों में लग जाते थे। दिन में बैलों से चरस से पानी निकालकर खेती कार्य में लगे रहते थे। इसके बाद रात को चौपाल पर एकत्रित होकर मंजीरा अलगोजाओं के साथ फाग उत्सव मनाते थे। महिलाएं भी रात भर गीत गाकर होली पर्व मनाया करती थी। होली के रोज सामूहिक रूप से ग्रामीण एकत्र होकर रात भर फाग उत्सव मनाते थे। बुजुर्ग लोग धमाल गाते और युवा वर्ग नृत्य करते। युवा वर्ग गांव में एक जगह एकत्रित होकर कबड्डी, गेंद शोटा, सितोलिया आदि खेलते थे। अब होली के दिन ही चंद घटों की होली की मस्ती नजर आती है।...

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