[karauli] - आधुनिकता पर भारी धमाल हमारी, कायम है रियासतकालीन परम्परा

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हिण्डौनसिटी. रंगों के त्योहार होली पर रियासत काल से चली आ रही हिण्डौनसिटी की धमाल आज भी अपने पुराने अंदाज को सहेजे हुए है। नंगाड़ों की गूंज के साथ हवा में लहरती लाठियां-तलवार और आसमां में उड़ते सतरंगी गुलाल के गुबार धमाल को परम्परागत सौहाद्र और मस्ती की झलक देते हैं। पीढिय़ां बीतने के बाद भी धाकड़ समाज की सदियों पुरानी धमाल की रंगत में कुछ नहीं बदला है। वर्ष भर रोजमर्रा की आपाधापी में रहने वाले समाज के युवा व नौकरीपेशा लोग धुलण्डी पर धमाल में गुलाल में सराबोर हो ढोल-नगाड़े की थाप पर नाचते नजर आते हैं। परम्परागत गीत ठड्डा की स्वर लहरियां भी आधुनिकता पर भारी हैं।...

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