[nainital] - नए पाठ्यक्रम में डाॅक्टरों को जीवनरक्षक तकनीक आना जरूरी

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हल्द्वानी। मेडिकल काउंलिस ऑफ इंडिया ने एमबीबीएस के पाठ्यक्रम में बदलाव कर दिया है। अब एमबीबीएस के छात्र-छात्राओं को जीवन रक्षक तकनीक, टांके लगाना, ब्लड प्रेशर नापने के साथ ही अन्य जानकारी करना आवश्यक है। छात्र-छात्राएं दो महीने की तैनाती अपनी इच्छानुसार लैब, अस्पताल, रिसर्च में करा सकते हैं।

राजकीय मेडिकल कॉलेज के लेक्चर थियेटर में मंगलवार को मेडिकल एजुकेशन यूनिट के इंचार्ज डॉ. सौरभ अग्रवाल ने एमबीबीएस के बदले पाठ्यक्रम के बारे बताया। कहा कि एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे छात्र-छात्राओं को सूचर (टांके) लगाना, मरीजों में ग्लूकोस नापना, यूरिन का विशलेषण करना आना अति आवश्यक है। साथ ही कंप्यूटर का बुनियादी ज्ञान आना जरूरी है। प्रथम वर्ष में छात्रों को एनाटामी, बायोकेमिस्ट्र्री फिजियोलाजी पढ़ाई जाती है। अब इन विषयों में थ्योरी के अलावा चिकित्सकीय रूप से भी पढ़ाया जाना आवश्यक होगा। छात्रों को चिकित्सालयों में ले जाकर मरीजों के पास जाकर सीखना भी होगा। थ्योरी का ज्ञान, चिकित्सकीय ज्ञान, मनोदृष्टि का ज्ञान और बातचीत का कौशल वाला छात्रा ही योग चिकित्सक बनने लायक होगा। छात्रों को चारों श्रेणी में पास होना आवश्यक है। इस दौरान प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा, एमएस डॉ. अरुण जोशी, डॉ. एसआर सक्सेना, डॉ. अजय आर्य, डॉ. विनय कुमार, डॉ. जीएस तितियाल, डॉ. भावना श्रीवास्तव, डॉ. एके सिंह, डॉ. उमेश, डॉ. गजाला रिजवी, डॉ. वी सत्यवली, डॉ. साधना अवस्थी, डॉ. मृणमय दास आदि थे।...

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