[chamoli] - पुडियाणी गांव में महिलाओं ने स्वयं तैयार किया जंगल

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कर्णप्रयाग। लकड़ी, चारा-पत्ती और पानी की समस्या से निजात पाने के लिए 39 साल पहले शुरू की गई पुडियाणी गांव की महिलाओं की मेहनत रंग लाई है। महिलाओं ने स्वयं के प्रयासों से गांव में बांज, बुरांश, काफल समेत कई पौधे लगाए थे जहां अब विशाल जंगल बन गया है। इस जंगल से आज गांव के पेयजल स्रोत रिचार्ज हो रहे हैं तो महिलाएं यहीं से अपनी जरूरतें पूरा करती हैं। जंगल की सुरक्षा के लिए समिति बनाकर अध्यक्ष और वन रक्षक भी रखा गया है।

कर्णप्रयाग शहर से 20 किमी दूर नौटी मोटर मार्ग पर करीब 210 परिवारों वाला पुडियाणी गांव है। 39 साल पहले इस गांव में पानी की भारी किल्लत थी। गांव के लोग कुएं के अलावा अन्य दूसरे गांवों से पानी लाकर पीते थे। ऊंचाई वाला क्षेत्र होने के कारण जलावनी लकड़ी और पशुओं के लिए चारा पत्ती की भी भारी कमी थी। इन सब समस्याओं से निजात पाने के लिए गांव की महिलाओं ने एक समूह बनाया। योजनाबद्ध तरीके से गांव के पास बांज, फनियाट, बुरांश, काफल, कटकटी, अंग्याल के 400 पौधों को रोपा गया। गांव में पानी की भारी कमी थी, लिहाजा महिलाओं ने पीने के पानी से पौधों को सींचने के लिए पानी दिया। आज इसी का परिणाम है कि पुडियाणी गांव के छह वर्ग किमी में फैले इस जंगल में 450 से अधिक प्रजाति के करीब 10 लाख पेड़ हैं। गांव के लोग बताते हैं कि महिलाओं ने पौधों को अपने बच्चों की तरह पाला। पीठ पर गोबर, खाद-पानी ढोकर पौधों को दिया। वर्तमान समय में ये पेड़ जल स्रोतों को रिचार्ज कर लगभग 900 लोगों को पानी, चारा-पत्ती और जलावनी लकड़ी दे रहे हैं। साथ ही पशुपालन और दुग्ध उत्पादन के जरिए गांव में ही रोजगार भी पैदा कर रहे हैं।...

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