[chhindwara] - चुनाव संचालक पटवा जब अचानक बन गए उम्मीदवार

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संदीप चवरे

छिंदवाड़ा जिले में 1997 का संसदीय उपचुनाव लोगों के लिए यादगार है। पहली बात ये कि कांग्रेस को अब तक की इकलौती हार इस चुनाव मे मिली। दूसरा ये कि भाजपा ने पहली बार किसी बाहरी प्रत्याशी को यहां मैदान में उतारा था। उस चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले और तत्कालीन भाजपा जिला अध्यक्ष कन्हईराम रघुवंशी ने बताया कि छिंदवाड़ा सीट से चौधरी चंद्रभान का नाम तय था। नाम दाखिल करने की अंतिम तारीख आने से पहले छिंदवाड़ा को लेकर भोपाल में एक बैठक हुई। इसमें छह लोग शामिल हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष कुशाभाउ ठाकरे, प्रदेश अध्यक्ष कैलाश जोशी, संगठन महामंत्री कृष्णमुरारी मोघे ,वरिष्ठ नेता कैलाश सारंग, पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा और वे स्वयं। की इस बैठक में तय हुआ कि चौधरी चंद्रभानसिंह पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी होंगें और पटवा चुनाव संचालक। बैठक में कुशाभाउ ठाकरे ने प्रस्ताव रखा पटवा के सहयोगी के रूप में मोघे और सारंग को सहयोगी बनाने का निर्णय होगा। जिला चुनाव समिति बनाने की बात आई तो निर्णय लिया गया कि यह काम छिंदवाड़ा पहुंचकर होगा। इस बीच पटवा ने कहा कि मुझे कुछ कहना है अध्यक्षजी से। कैलाश जोशी ने कहा कहो। पटवा ने कहा आपने मुझे आजतक प्रदेश के किसी भी चुनाव में कहीं का संचालक बनाया है क्या? मैं तो अब तक उम्मीदवार ही बना हंू। मेरे अपने चुनावों में भी दूसरों ने ही इसका जिम्मा संभाला है। मुझे नहीं मालूम कैसे किया जाता है संचालन। ठाकरे जी ने सुना और सभी की तरफ बारीबारी से देखा और कहा कि अपने को दूल्हा मिल गया और अपन सब बाराती बनेंगे। उनका आशय ये था कि पटवा छिंदवाड़ा से उम्मीदवार रहेंगे लेकिन ये बात इन छह लोगों के अलावा किसी को पता न चले फार्म भरने तक यह भी तय हुआ। दूसरे दिन नामांकन की आखिरी तारीख थी। सब छिंदवाड़ा आए और तय समय पर जिला अध्यक्ष कन्हईराम रघुंवशी ने एबी फार्म भरा तो सुंदरलाल पटवा के नाम का। पटवा जो चुनाव संचालन करते वाले थे वे उम्मीदवार बन गए। चुनाव संचालक बने कृष्ण मुरारी मोघे और उनके सहयोगी बने कन्हईराम रघुवंशी, मेघराज जैन और कैलाश सारंग।...

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