अक्स -ऐ -खुशबू😍 हूं बिखरने से न रोके कोई

  |   Shayari

अक्स -ऐ -खुशबू😍 हूं बिखरने से न रोके कोई ,

और बिखर जाऊं तो मुझे 😞न समेटे कोई।

कांप उठती हूं मैं 😢इस तन्हाई में ,

मेरे चेहरे पे तेरा 👉नाम न पढ़ ले कोई।

जिस तरह ख्वाब मेरे हो 🤗गए रेज़ा-रेज़ा ,

इस तरह से न कभी👀 टूट के बिखरे कोई।

📲 Get हिंदी शायरी on Whatsapp 💬