उड़ने दो इन परिंदों 🦅 को आज़ाद फ़िज़ाओं में

  |   Shayari

उड़ने दो इन परिंदों 🦅 को आज़ाद फ़िज़ाओं में ,

तुम्हारे होंगे अगर तो लौट🤗 आएंगे किसी रोज़ ।

अपने सितम को 👉देख लेना खुद ही साक़ी तुम ,

ज़ख़्म-ऐ -जिगर तुमको 👀 दिखाएगें किसी रोज़।

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