[kaushambi] - दल बदलकर राम निहोर राकेश बने थे कांग्रेस के आखिरी सांसद

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दल बदलकर राम निहोर राकेश बने थे कांग्रेस के आखिरी सांसद

1989 के बाद से दोआबा में खाता खोलने को तरस रही कांग्रेस

सिराथू। 1989 के लोकसभा चुनाव में दोआबा की चायल सुरक्षित सीट से राम निहोर राकेश ने पाला बदल कांग्रेस का दामन थाम लिया। कांग्रेस के टिकट से चुनावी समर में कूदे राकेश के सिर पर दोआबा की जनता ने फिर से जीत का सेहरा बांध दिया। दोआबा की जनता का कांग्रेस के लिए यह आखिरी आशीर्वाद रहा।

दल बदल करने में माहिर हो चुके राम निहोर राकेश ने नौंवी लोक सभा चुनाव में अपने पुराने संबंधों का हवाला देेकर एक बार फिर कांग्रेस का दामन थाम लिया था। सियासत के खेल में माहिर खिलाड़ी की तरह रामनिहोर राकेश ने दिल्ली में जुगाड़ फिट कर चायल (सु) सीट हासिल करने में कामयाब रहे। राकेश ने दोआबा के पुराने कांग्रेसियाें के गिले शिकवे दूर कर मना लिया। इस चुनाव में जनता दल और बसपा का उदय हो चुका था। दोआबा की धरती पर कांग्रेस और जनता दल के बीच रोचक सियासी संग्राम हुआ। जनता दल से प्रत्याशी बनकर आए भगवंत प्रसाद वीपी सिंह की आंधी में कांग्रेस के राम निहोर राकेश को कड़ी टक्कर दे रहे थे। कांग्रेस और जनता दल के समर्थकों ने चुनाव अपने पक्ष में बनाने के लिए रात-दिन एक कर दिया था। जनता दल से मिली कड़ी टक्कर ने राम निहोर राकेश की नींद हराम कर दी थी। चुनाव पक्ष में करने के लिए राकेश ने एड़ी-चोटी की ताकत लगा दी। तमाम मशक्कत के बाद चुनाव में कांग्रेस के राम निहोर राकेश 155738 मत पाकर जीत अपने नाम दर्ज कराने में कामयाब रहे। वहीं जनता दल प्रत्याशी भगवंत प्रसाद 143685 मत पाकर दूसरे स्थान पर रहे। राकेश ने चुनाव में 12053 मतों से जीत दर्ज कराई। इसी के साथ ही चायल सीट से कांग्रेस की यह आखिरी जीत रही। इसके बाद से अब तक दोआबा से हाशिए पर गई कांग्रेस खाता खोलने के लिए तरस रही है। खास बात ये रही इसी चुनाव में पहली बार बसपा ने भी जोर आजमाइश की थी। अपने पहले चुनाव में पार्टी प्रत्याशी आरडी सरोज को 48356 मतों के साथ ही तीसरे स्थान पर रहना पड़ा था। चुनाव में डीडीपी के कल्लू प्रसाद ने 5966 के साथ ही निर्दल उम्मीदवार विंदेश्वरी आर्या व सुरेश चंद्र सोनकर को 7016 व 1975 मतों से ही संतोष करना पड़ा था।

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