[mainpuri] - काश बहू को ससुराल में बेटी समझ लेते.......

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काश! बहू को ससुराल में बेटी समझ लेते...

आलीपुर खेड़ा। कल्याण वाटिका मैरिज होम में शायर फैज अहमद फैज की अध्यक्षता में मुशायरा कार्यक्रम हुआ। इसमें तमाम शायरों ने कलाम पेश किए।

विद्या बाल कल्याण सेवा सदन और उर्दू भाषा विकास परिषद नई दिल्ली के सहयोग से हुए मुशायरे का हाजी हाशिम जमाल साबरी ने शुभारंभ किया। निजामत आसिफ अल्तमश ने की। फरमान कुरावलिया ने कोई बेटी किसी बाप को फिर बोझ न लगती, बहू को भी ससुराल में बेटी समझ लेते, कलाम पढ़ा। राहत ने आती है मौत भूख से आए भले, मगर रोटी वतन को बेच कर खाई न जाएगी। आशिफ अल्तमश ने वो तेरे इश्क को फेंकेगी किसी कचरे में, गिफ्ट सीने से लगाएगी शायरी सुनाई। कार्यक्रम के आयोजक करुणानिधि पांडेय, दयानिधि पांडेय, जैनउद्दीन अब्बासी, यूसुफ खान, महफूज खान, दीपक पांडेय, अफरोज, आफाक खान, अब्दुल, शोएब इलाही, अलाउद्दीन मंसूरी, रियासुद्दीन मंसूरी मौजूद रहे।

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