[meerut] - कैराना सीट पर सपा, बसपा और रालोद का कड़ा इम्तिहान, उप-चुनाव में ही पड़ी थी गठबंधन की नींव

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खास बातें

2014 में भाजपा के हुकुम सिंह ने जीती थी कैराना लोकसभा सीट।

2018 में हुकुम सिंह के निधन के बाद हुए उप चुनाव में रालोद जीता।

कैराना लोकसभा सीट सियासी उलटफेर के लिए जानी जाती है। 1980 में कांग्रेस की लहर में जब पूरे विपक्ष का सफाया हो गया तब, यहां के मतदाताओं ने चौधरी चरण सिंह की धर्मपत्नी गायत्री देवी को जिताकर संसद में भेजा था। पिछले पांच साल में यहां के समीकरणों में काफी बदलाव आया है। 2014 में भाजपा के हुकुम सिंह ने सपा को हराकर यह सीट जीती थी।

2018 में उनके निधन के चलते यहां हुए उप चुनाव में ही सपा, रालोद और बसपा के बीच गठबंधन की नींव पड़ी थी। पूर्व सांसद तबस्सुम हसन उस समय सपा में थीं और उन्हें रालोद के टिकट पर चुनाव लड़ाया गया। बसपा और कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी नहीं उतारा। उप चुनाव में तबस्सुम हसन ने हुकुम सिंह की बेटी भाजपा प्रत्याशी मृगांका सिंह को हराकर सीट जीत ली थी।...

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