[ajmer] - Danger: तरस जाएंगे आप खरमौर देखने के लिए, गोडावण जैसा हो गया है हाल

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रक्तिम तिवारी/अजमेर.

जिले के शुभंकर पक्षी खरमौर पर जबरदस्त संकट मंडरा रहा है। अंधाधुंध खनन, प्राकृतिक आपदाएं और असंतुलित होते पर्यावरण ने खरमौर को नुकसान पहुंचाने में जुटे हैं। जिले के शोकलिया-भिनाय क्षेत्र का उचित संरक्षण नहीं किया गया तो लोग भविष्य में गोडावण की तरह खरमौर को देखने के लिए भी तरस जाएंगे।

वन्य क्षेत्र और वन संपदा में लगातार कमी से पशु-पक्षियों पर जबरदस्त असर पड़ा है। खरमौर भी इनमें शामिल है। अजमेर जिले में सोकलिया, गोयला, रामसर, मांगलियावास और केकड़ी खरमौर के पसंदीदा क्षेत्र है। मूलत: प्रवासी पक्षी कहा वाला खरमौर इन्हीं इलाकों के हरे घास के मैदान, झाडिय़ों युक्त ऊबड़-खाबड़ क्षेत्र में दिखता रहा है। खासतौर पर मानसून की सक्रियता (जुलाई से सितंबर) के दौरान तो यह अक्सर रहते आए हैं। लेकिन अब यह विलुप्त होती प्रजातियों में शामिल होने की कगार पर पहुंच रहा है।...

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