[alwar] - सुनो प्रशासन! मैं काली मोरी फाटक हूं, शहर को देता हूं दर्द, दिक्कत और जाम

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मैं काली मोरी फाटक हूं। रेलवे ने मुझे बंद किया और बाकी सब मेरा गला घोंटने को आतुर है। जिससे आम आदमी दर्द, दिक्कत, जाम और जख्म झेलने को मजबूर है। फाटक बंद होने से ट्रेन के आने पर ही कभार जाम लगता था। अब हर दिन सडक़ पर खड़े होने वाले वाहन, ठेले व खोखे, गन्ने के रस की दुकान और अनाधिकृत वाहन पार्र्किंग ने मेरा स्वरूप ही बिगाड़ दिया है।

जिन पर मुझे बचाए रखने की जिम्मेदारी है वे खुद सडक़ रोक कर बैठे हैं। तभी तो करीब 100 फीट से अधिक चौड़ी सडक़ पर शाम के समय निकलने को जगह नहीं मिल पाती। जबकि फाटक के ठीक सामने सडक़ की जगह पर ही अरावली विहार पुलिस थाने की चौकी है। जिस पर अधिकतर समय ताला लटका रहता है। मेरी अनदेखी यूं ही बरकरार रही तो सडक़, नाले, फाटक के आगे का हिस्सा सब अपने अस्तित्व को खो बैठेगा। मैं भी फिर भूतकाल में समा जाऊंगा। आज के युवा दशकों बाद कहेंगे कि यहां कभी फाटक हुआ करता था। यह कल्पना साकार नहीं हो इसके लिए समय रहते मुझे बचा लो...।...

फोटो - http://v.duta.us/f3hm-QAA

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