[barmer] - दो सौ की ओपीडी, एक चिकित्सक और चार बेड, कैसे हो बेहतर उपचार

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सिवाना. चिकित्सा सेवा में पिछड़े जिले में सेवा सुधार को लेकर प्रयास नाकाफी नजर आ रहे हैं। इसका उदाहरण पादरू कस्बा है, जिसकी आबादी पच्चीस हजार है। आसपास के दर्जनों गांवों से मरीज यहां आते हैं। हर दिन दो सौ की आेपीडी रहती है और अभी भी यहां प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र (पीएचसी) है जबकि लम्बे समय से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (सीएचसी) की दरकार है। हर बार राज्य सरकार का बजट पारित होने से पूर्व ग्रामीण सीएचसी की

उम्मीद संयोते हैं और बजट घोषणा के साथ निराश हो जाते हैं।

25 हजार आबादी वाला कस्बा पादरू, उपखंड सिवाना का दूसरा बड़ा कस्बा है। एेसे में यहां चिकित्सा, शिक्षा और मूलभूत सुविधाओं के बेहतर होने की उम्मीद रहती है, लेकिन यहां चिकित्सा सुविधा बेहतर नजर नहीं आती। कस्बे के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में हर दिन उपचार के लिए कस्बे व क्षेत्र के गांवों से औसतन दो सौ से अधिक मरीज पहुंचते हैं, लेकिन इनके उपचार के लिए एकमात्र चिकित्सक है। इस पर ग्रामीणों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता है। अधिक बीमार मरीजों को भर्ती करने के लिए नाममात्र 4 बेड है। एेसे में मरीजों को बालोतरा, जोधपुर या सिवाना ले जाना पड़ता है। वहां आने-जाने की दिक्कत के साथ भर्ती करने पर परिजनों को रुकने भी परेशानी होती है। जरूरत है तो इतनी की पीएचसी को सीएचसी में क्रमोन्नत कर सुविधाओं का विस्तार किया जाए। सीएचसी बनते ही स्टाफ व चिकित्सक लगने से समय पर लोगों को इलाज मिल जाएगा, लेकिन लम्बे समय से मांग के बावजूद सरकार इस आेर ध्यान नहीं दे रही।...

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