[bihar] - लोकसभा चुनाव 2019: संघ और समाजवाद की 'जंग' में दरभंगा का दिल जीतने की चुनौती

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'मिथिलांचल का दिल' कहे जाने वाला दरभंगा अपने समृद्ध अतीत और प्रसिद्ध दरभंगा राज के लिए जाना जाता है. यह जिला अपनी सांस्कृतिक और शाब्दिक परंपराओं के लिए मशहूर है और शहर बिहार की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में लोकप्रिय है. यहां का इतिहास रामायण और महाभारत काल से जुड़ा है जिसका जिक्र भारतीय पौराणिक महाकाव्यों में भी है. बहरहाल बीतते दौर के साथ दरभंगा ने कई बदलाव देखे हैं. कभी कांग्रेस की राजनीति का गढ़ रहा दरभंगा बदलते वक्त के साथ कभी समाजवादी राजनीति की प्रयोगशाला बनी तो कभी दक्षिणपंथी राजनीति की कर्मभूमि बन गई.

दरभंगा ने दिग्गजों को देखा

चुनावी राजनीति में दरभंगा का इतिहास बहुत पुराना है. ब्रिटिश भारत में यहां पहली बार 1893 में चुनाव हुआ था. इस चुनाव में दरभंगा राज परिवार के लक्ष्मेश्वर सिंह निर्वाचित हुए थे. इसके बाद कई चुनावों में दरभंगा राज परिवार के सदस्य जीतते रहे थे. कालांतर में दरभंगा की जनता ने अपने क्षेत्र से कई दिग्गज नेताओं को लोकसभा और विधानसभा भेजा. ये अलग-अलग सरकारों में मंत्री भी रहे....

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