[chamoli] - पुरातत्व विभाग के नियमों के शिथिलीकरण की उठाई मांग

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गोपेश्वर। प्राचीन गोपीनाथ मंदिर के संरक्षण का जिम्मा संभाले पुरातत्व विभाग ने मंदिर के इर्द-गिर्द भवन स्वामियों को नोटिस भेजने और नवनिर्मित भवनों के ध्वस्तीकरण के आदेश का स्थानीय लोगों ने विरोध किया है। लोगों का कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में पुरातत्व विभाग के नियमों का पालन करने से लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। नगर की भौगोलिक स्थिति को मद्देनजर नियमों में शिथिलता बरती जाए।

रविवार को गोपीनाथ मंदिर प्रांगण में हुई गोपेश्वर गांव और नगर के लोगों की बैठक में नगर पालिका सभासद नवल भट्ट ने कहा कि नगर क्षेत्र में लोगों ने अपनी खून-पसीने की कमाई से मकान का निर्माण करवाया है। लेकिन भवन स्वामियों को पुरातत्व विभाग द्वारा नोटिस भेजा जाना सरासर गलत है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के नियमों से पहाड़ी क्षेत्रों में नगर और गांवों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। बैठक में निर्णय लिया गया कि मामले को लेकर स्थानीय लोगों का शिष्टमंडल पुरातत्व विभाग के अधिकारियों से भेंट कर सकारात्मक कार्रवाई की मांग करेगा। इसके लिए एक संघर्ष समिति का गठन भी किया गया। सर्वसम्मति से नवल भट्ट को अध्यक्ष और अशोक बिष्ट को कोषाध्यक्ष बनाया गया। जबकि पूरण सिंह, सुशीला सेमवाल, शांति प्रसाद भट्ट, गोपाल प्रसाद भट्ट, मंगला कोठियाल व वृजमोहन बिष्ट को सदस्य बनाया गया है। इस मौके पर हरीश भट्ट, चिंता देवी, विश्वेश्वरी देवी, कलावती राणा, जगदंबा प्रसाद भट्ट, प्रदीप सिंह पंवार, निसार अहमद, एमएस चौहान आदि मौजूद थे।

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