[haridwar] - मानव शरीर में ही निहित है असाध्य रोगों का उपचार

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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार। वैदिक आयुर्विज्ञान प्रतिष्ठान संस्थान, नंदीपुरम (नौरंगाबाद) के तत्वावधान में गैंडीखाता में आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला के तीसरे दिन रविवार को प्रतिभागियों को मर्म चिकित्सा के गूढ़ रहस्यों के बारे में बताया गया। आयोजक डॉ. सुनील जोशी ने मानव शरीर में स्थित 107 मर्म बिंदुओं के स्थलों का प्रयोगात्मक अवलोकन और विभिन्न रोगों में किस मर्म बिंदु को उत्प्रेरित कर रोग का निदान करने की जानकारी दी।

डॉ. सुनील जोशी ने कहा कि मानव के शरीर में ही रोगों के निदान की असीम ऊर्जा प्रवाहित हो रही है। यह हमारा प्राचीन आयुर्वेद सिद्ध कर चुका है। एक्युप्रेशर और मर्म चिकित्सा दोनों का समान प्रभाव देखने को मिलता है। चीन में इसी विद्या को एक्युपेंचर के रूप में उपयोग किया जाता है। विश्व के विभिन्न देशों ने हमारी मर्म चिकित्सा को अलग अलग नाम देकर अपनाया है। डॉ. मयंक जोशी, डॉ. राजीव कुमार, डॉ. प्रांजल जोशी, डॉ. रामारमन ने प्रयोगात्मक सत्र में प्रशिक्षणार्थीयों को मर्म चिकित्सा के गूढ़ रहस्यों की जानकारी दी। कनाडा से आए डॉ. ज्ञान प्रकाश ने कहा कि आधुनिक एलोपैथिक चिकित्सा की पढ़ाई में भी चिकित्सकों को ऑपरेशन करते समय इन मर्म बिंदुओं को सुरक्षित रखते हुए ऑपरेशन किए जाने की जानकारी दी। डॉ. प्रांजल जोशी, शत्रुघ्न डबराल ने असाध्य रोगों से ग्रसित रोगियों का मर्म चिकित्सा पद्घति से उपचार किया।

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