[jagdalpur] - अस्पताल आने का समय हो या एमरजेंसी, हमेशा लेट होते है सीनियर डॉक्टर, जूनियर के भरोसे टिका बस्तर का मेडिकल कॉलेज

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जगदलपुर. मेडिकल कॉलेज में गायनिक वार्ड के एचओडी समेत सीनियर डॉक्टरों का फोकस निजी प्रैक्टिस पर अधिक है। चाहे मेडिकल कॉलेज आने का समय हो या फिर एमरजेंसी के समय दोनों ही मौकों पर यह डॉक्टर हॉस्पिटल पहुंचने में लेट हो जाते हैं। जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ता है।

इसकी सजा मरीजों को भुगतनी पड़ती है

यह मेडिकल कॉलेज के किसी एक का नहीं बल्कि करीब-करीब सभी विभाग का हैं। वहीं दूसरी तरफ यही डॉक्टर अपनी क्लिनिक में मरीजों को समय पर पहुंचकर घंटो समय देते हैं। ऐसे में मेडिकल कॉलेज में इलाज का जिम्मा जूनियर डॉक्टरों के हाथों हैं। यह जूडॉ मेडिकल कॉलेज में अपना पूरा समय तो दे रहे हैं लेकिन ऐसे एमरजेंसी केस जिसमें सीनियरों की जरूरत है, उस समय उनका साथ नहीं मिल पाता और इसकी सजा मरीजों को भुगतनी पड़ती है।...

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