[mandsaur] - करोड़ों फूंक दिए, फिर भी नहीं गूंजी एक भी किलकारी

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मंदसौर.

स्वास्थ्य महकमे में इच्छाशक्ति की कमी जननी का राहत नहीं दे पा रही है। हर महीने लाखों-करोड़ों रूपए खर्च के बाद भी प्रसुताओं को डिलेवरी के लिए भटकना पड़ रहा है। सरकार स्वास्थ्य योजनाएं आनन-फानन में चालू तो कर देती है, लेकिन इन योजनाओं को समाज के हर तबके तक पहुंचाने में नाकाम रहती है। ऐसे में लोगों को समय पर वे सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। जिनका वे हकदार है। जिले में पीएचसी और सीएससी के स्टाफ व मशीनरी पर हर महीने लाखों रूपए खर्च किए जा रहे है, लेकिन उच्च स्तर पर मॉनीटरिंग नहीं होने की वजह से इसका उचित लाभ प्रसुताओं को नहीं मिल पा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की नाकामी कहे या प्रयासों में कमी का असर। करोड़ों रूपए खर्च करने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के आधा दर्जन केंद्रों पर पिछले पांच माह में एक भी प्रसव नहीं हुआ है। संस्थाओं की दिवारें बच्चों की किलकारी गूंजने का इंतजार कर रही है। इन संस्थाओं और स्टाफ पर करीब करोड़ों़ से अधिक खर्च किए जा चुके है।...

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