[rampur] - मदरसा जामे उलूम फुरकानिया में दस्तारबंदी जलसे का आयोजन हुआ

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रामपुर। मदरसा जामे उलूम फुरकानिया में 71वें सालाना जलसा ए दस्तारबंदी का आयोजन किया गया। जिसमें तालिब ए इल्म को इनामात भी तकसीम किए गए। मिस्टन गंज स्थित मदरसे में जलसे का आगाज कारी मोहम्मद मामून शुएब और कारी मोहम्मद कैफ की तिलावत ए कुरान से हुआ। मौलवी मोहम्मद फैजान खां ने बानीये हजरत खतीबे आजम रह. की हम्दे बारी ताला पेश की और मोहम्मद अमान ने बारगाहे रिसालत ए माब सअव. में हदिया नाते पाक पेश किया। मौलवी मोहम्मद माहिर खां और उनके हमराहियान ने फुरकानिया की शान में तराना ए फुरकानिया पेश किया। इसके बाद दौरा ए हदीस से फारिग होने वाले तालिबे इल्म मौलवी मोहम्मद वसी फुरकानी ने तकरीर करते हुए उम्मत में इत्तेहाद और अखुव्वत के फवाइद बयान किए। मौलवी मोहम्मद बदरुज्जमा ने असरी उलूम में मदरसा फुरकानियाकी नुमाइंदगी का सबूत पेश करते हुए अंग्रेजी में तकरीर पेश की। मौलवी शकील अहमद ने अरबी जुबां में तकरीर करते हुए इल्म की फजीलत व अहमियत बयां की। इसके साथ ही अन्य लोगों ने भी तकरीर की जिसमें मदरसा जामे उल उलूम फुरकानिया के इतिहास के बारे में भी जानकारी दी गई। जलसे में पहला स्थान हासिल करने तालिब ए इल्म को इनामात तकसीम किए गए और दस्तारबंदी भी की गई। संयुक्त सचिव डॉ. शायर उल्लाह खां वजीही ने इदारे की सालाना रिपोर्ट पेश की। पटना से आए मेहमान ए खुसूसी ने फरमाया कि इंसान की पैदाइश के वक्त फरिश्तों ने मुखालिफत की और इंसान की इस सिफत को बारगाहे खुदा वंदे कुददूस में बयान किया, कि ऐसी मखलूक जो खून रेजी करने वाली है उसकी तखलीक आखिर क्यों मगर जब फरिश्तों और इंसान का इम्तिहान हुआ तो कामयाब होने वाली मखलूक इंसान थी फरिश्ते नहीं। जलसे का समापन मुफ्ती महबूब अली साहब मुफ्ती ए आजम रामपुर की दुआ ए खेर से हुआ।

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