[rampur] - राजकीय इंटर कालेजों पर करोड़ों खर्च, फिर भी फिसड्डी

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रामपुर। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के सरकारी स्कूल इस साल भी टॉपर्स देने में नाकाम रहे। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में जो भी टॉपर्स आए हैं, वे प्राइवेट स्कूलों से हैं। सिर्फ तीन बच्चे राजकीय एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों के ही टॉपटेन की सूची में जगह बना पाने में कामयाब हो चुके हैं। ऐसे में राजकीय और सहायता कालेजों में शिक्षा की गुणवत्ता सवालों के घेरे में आ गई है।

सरकार की ओर से शिक्षा में सुधार के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी सरकारी स्कूल शिक्षा के मामले में फिसड्डी साबित नजर आ रहे हैं। सिर्फ रामपुर की ही बात की जाए तो यहां 37 राजकीय इंटर कालेज हैं। 27 सहायता प्राप्त एवं 144 वित्तविहीन कालेज हैं। सरकारी आंकड़ों की मानें तो हर कालेज को संचालित करने के लिए हर माह करीब बारह लाख रुपये की दरकार होती है। सरकार से यह पैसा मिलता भी है, लेकिन इसके बाद शिक्षा का स्तर सुधरने के बजाय गिरता जा रहा है। वजह है संसाधनों की कमी। इन कालेजों में प्रयोगशालाएं तो बनीं हुईं हैं, लेकिन इन प्रयोगशालाओं में सालों से सामान की खरीदारी नहीं हो सकी है। ऐसे में प्रयोगशालाएं भी किसी कबाड़खाने जैसी नजर आती हैं। शिक्षकों की व्यापक कमी है। करीब पचास से 60 फीसद शिक्षकों के पद खाली हैं। और जो शिक्षक हैं भी तो वह भी पढ़ाना नहीं चाहते। लिहाजा, स्कूलों में शिक्षा की यह डोर कमजोर होती नजर आ रही है। शनिवार को जारी हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट के परीक्षा परिणाम को देखा जाए तो शिक्षा की इस बदहाली का साफ असर दिखाई दिया। हाईस्कूल की मेरिट में कुल पंद्रह बच्चे टॉपटेन की सूची में आए हैं, जिनमें सिर्फ राजकीय इंटर कालेज मानकपुर बंजरिया के सौरभ कुमार और सहायता प्राप्त आदर्श कृषक इंटर कालेज किरा के युद्घवीर सिंह ही मेरिट में स्थान बना पाने में कामयाब हो सके। इसी तरह इंटरमीडिएट की मेरिट में कुल 17 छात्र छात्राएं आए थे, जिसमें सिर्फ राजकीय खुुर्शीद कन्या इंटर कालेज की शालू शामिल हो सकीं।

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