[varanasi] - ‘नैतिकता के पतन से परिवार जैसी संस्था विलुप्त हो रही’

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वाराणसी। आज के परिवेश में नैतिकता के पतन के कारण परिवार जैसी संस्था धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है। आधुनिकता की तरफ समाज बढ़ रहा है इसके साथ ही यौन संबंधों की स्वतंत्रता की मांग बढ़ती जा रही है और उसकी वजह से परिवार भी टूटते जा रहे हैं। उक्त विचार कुलपति प्रो. टीएन सिंह ने व्यक्त किए। वह रविवार को महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के गांधी अध्ययन पीठ सभागार में विधि विभाग की ओेर से आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।

वैवाहिक संस्था की पवित्रता एवं नैतिकता एवं यौन संबंधों में स्वातंत्रय की मांग आदर्श एवं यथार्थ विषयक दो दिवसीय संगोष्ठी के समापन के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि विवाह संस्था की पवित्रता के लिए विधि को उनके अनुरूप होना चाहिए। स्वर्णकांता शर्मा ने कहा कि आदर्श और यथार्थ स्थिति में बहुत बड़ा अंतर नजर आता है। जामिया मिल्लिया इस्लामिया की प्रो. नुजहत परवीन ने कहा कि विवाह जैसी संस्था अब एक-दूजे के लिए से बिन फेरे हम तेरे तक पहुंच गई है। प्रो. रुद्र प्रकाश राय ने कहा कि विवाह जैसी संस्था अपनी मूल भावना से हटकर संविदा की तरफ बढ़ रही है। संचालन डॉ. केशरी नंदन शर्मा, रामजतन, डॉ. शिल्पी गुप्ता एवं डॉ. हंसराज ने किया। विभागाध्यक्ष प्रो. रंजन कुमार स्वागत और संकायाध्यक्ष प्रो. चतुर्भुज नाथ तिवारी ने धन्यवाद दिया। इस अवसर पर प्रो. रमाशंकर त्रिपाठी, डॉ. निमिषा गुप्ता, डॉ. विजय राय, डॉ. सुभाष सिंह, डॉ. रामजतन, डॉ. रमेश सिंह एवं डॉ. मनीष कुमार राय आदि मौजूद रहे।

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