करोड़ों खर्च और एक साल में सिर्फ 1700 लाभार्थी बच्चे बढ़े

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बिछुआ, चौरई, जामई में कम गई संख्या

छिंदवाड़ा. बाल विकास परियोजना के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के पोषण के साथ उनकी औपचारिक शिक्षा की व्यवस्था की जाती है। आंगनबाड़ी में जन्म लेने के बाद से छह वर्ष तक की उम्र के बच्चों का डाटा भी रखा जाता है। बच्चों की उम्र तीन वर्ष होने के बाद तीन साल तक आंगनबाड़ी में पहुंचाया जाता है। यहां उनके खेलकूद, स्वास्थ्य की जानकारी तो रखी जाती ही है उन्हें शुरुआती शिक्षा भी दी जाती है।

जिले में हर साल दर्ज होने वाले बच्चों की संख्या तो बढ़ रही है, लेकिन आंगनबाड़ी केंद्रों में सरकारी योजनाओं का लाभ लेने वाले बच्चों की संख्या उस अनुपात में दिख नहीं रही है। छिंदवाड़ा की 14 परियोजनाओं का पिछले एक साल का आंकड़ा देखें तो इस दौरान पूरे आंगनबाड़ी केंद्रों का लाभ लेने वाले बच्चे पिछले साल की तुलना में केवल 1700 बढ़े जबकि दर्ज संख्या इससे कहीं ज्यादा रही है। 2018 में लाभार्थी बच्चों की संख्या 76 हजार 79 थी। 2019 में यह 77 हजार 801 रही यानी सिर्फ 1722 बच्चों की संख्या ही इस दौरान बढ़ी। विभाग ने अपने पोर्टल में भी यह आंकड़े डाले हैं। इस वर्ष अप्रैल तक की संख्या दर्ज है। अब इसे अभिभावाकों की आंगनबाड़ी केंद्रों के प्रति रुचि कम कहें या उनमें जागरुकता की ये पता करने का विषय है।...

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