44 करोड़ खर्च फिर भी गलियों और मोहल्लों में फॉल्ट तलाश रहे बिजलीकर्मी

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ग्वालियर. मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी शहरी उपभोक्ताओं को बेहतर बिजली सेवा देने के लिए 8 साल में स्काडा प्रोग्राम (सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन) पर अब तक करीब 44 करोड़ खर्च कर चुकी है। ये प्रोजेक्ट पांच साल में पूरा होना था, लेकिन अब तक नहीं हो सका है। प्रोजेक्ट पूरा हो जाता तो बिजली लाइनों पर आने वाले फॉल्ट को इंजीनियर दफ्तर में बैठकर देख सकते थे। बिजलीकर्मियों को गली, मोहल्लों में फॉल्ट की तलाश नहीं करनी पड़ती। वे सीधे प्वॉइंट पर पहुंचकर सुधार कर सकते थे।

शहर में बिजली का लोड बढ़ते ही फॉल्ट आने लगते हैं। कहीं केबल जलती है, कहीं ट्रांसफार्मर फेल हो रहे हैं। स्काडा प्रोग्राम में एसएलडी बॉक्स या वितरण बॉक्स खराब होने पर इंजीनियरों को सीधे कंट्रोल रूम में सिग्नल मिल जाता, जिस पर जेई स्तर के अधिकारी फील्ड में तैनात कर्मचारियों को सूचना दे सकते थे, जिससे उपभोक्ताओं के फोन आने पर बिजलीकर्मियों को फॉल्ट तलाशने की अपेक्षा सीधे प्वॉइंट की जानकारी लग जाती, जिससे उपभोक्ताओं को जल्द राहत मिलती।...

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