Bhagwat Katha जीव मात्र की मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है श्रीकृष्ण की लीलाएं

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नीमच. भगवान श्री कृष्ण की लीलाएं जीव मात्र की मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है। मनुष्य को हमेशा अच्छे कर्म करना चाहिए। पिता के पुण्य का फल पुत्र को प्राप्त होता है। आत्मा अमर हैऔर पुनर्जन्म होता है। किसी भी मनुष्य के अंत समय में जो भावना मन में होती है, वैसा ही उसका पुनर्जन्म होता है।

उक्त विचार ग्वालटोली में स्थित दीवान चौक पर 7 दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान गंगा महोत्सव के समापन अवसर पर कथा का वाचन करते हुए भागवताचार्य व श्री साकेत धाम आश्रम रतलाम के संस्थापक पंडित योगेश्वर शास्त्री ने व्यक्त किए। पंडित शास्त्री ने कृष्ण सुदामा मिलन के प्रसंग का वाचन करते हुए कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने इस प्रसंग के साथ आदर्श मित्रता को सिद्ध किया है। परिक्षित मोक्ष के प्रसंग में उन्होंने कहा कि जन्मेजय ने यज्ञ का आयोजन किया जिससे सातवें दिन राजा परिक्षित का मोक्ष हुआ। श्री चन्द्रवंशी ग्वाला समाज ग्वालटोली के दीवान परिवार द्वारा स्वर्गीय छोटीबाई दीवान, स्वर्गीय आरडी दीवान स्वर्गीय सीमा दीवान एवं स्वर्गीय रोहन दीवान बिट्टू की पुण्य स्मृति में यहां श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा महोत्सव का आयोजन एक से 7 जून तक किया गया। अंतिम दिन प्रात: हवन का आयोजन हुआ तत्पश्चात पंडित योगेश्वर शास्त्री ने अंतिम दिन की कथा का वाचन किया। इस आयोजन में स्थानीय सहित आसपास क्षेत्र के सैकड़ों भक्तगण ने सम्मिलित होकर धर्म की गंगा में डुबकियां लगाई और धर्म लाभ लिया। सभी ने गुरुजी का स्वागत अभिनंदन कर आशीर्वाद लिया। अंत में भागवत पौथी की आरती कर प्रसादी का वितरण किया गया। सात दिवसीय भागवत कथा आयोजन में प्रतिदिन सैकड़ों धर्मप्रेमीजन सम्मिलित हुए। गणमान्य अतिथियों ने गुरुजी का अभिनंदन कर भागवत कथा की पौथी की पूजा अर्चना की। अंत में कथा आयोजक दीवान परिवार के वरिष्ठ सदस्य हरनारायण दीवान ने आभार माना।...

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