👉करतारपुर कॉरिडोर और भारत-पाक 👥रिश्ते, आसान नहीं है श्रद्धालुओं 🗣️की राह

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जब भी भारत के साथ रिश्तों की बात आती है तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान करतारपुर कॉरिडोर परियोजना का जिक्र करना नहीं भूलते। हाल में बिस्केक में आयोजित एससीओ सम्मेलन के दौरान भी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने करतारपुर कॉरिडोर के निर्माण पर प्रतिबद्धता दोहराई। हालांकि, उनकी कथनी और करनी में फर्क को पूरी दुनिया ने देखा है। भले ही इस परियोजना को अपनी बता कितना भी पीठ ठोक लें लेकिन इस कॉरिडोर का प्रस्ताव सबसे पहले भारत ने ही साल 1988 में रखा था।

पाकिस्तान शुरू से ही करतारपुर कॉरिडोर के संचालन पर शर्तों का अड़ंगा लगा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, पड़ोसी देश ने भारतीय श्रद्धालुओं को विशेष परमिट से प्रवेश और फीस वसूलने की शर्त रखी है। साथ ही कॉरिडोर को सालभर खोलने और श्रद्धालुओं की तादाद पर भारत के प्रस्ताव का विरोध किया है।

अधिकारियों के मुताबिक गुरुद्वारा दरबार साहिब पर पाक ने भारत के सभी प्रस्तावों का या तो विरोध किया या फिर शर्तें लगा दी हैं। पाकिस्तान परमिट के एवज में शुल्क वसूलना चाहता है जबकि भारत ने वीजा फ्री-फीस फ्री यात्रा का प्रस्ताव रखा था।

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