लाहौल-स्पीति की चिनल को बचाने के लिए AMU में हो रहा शोध

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संस्कृत भाषा से लगभग मिलती जनजातीय भाषा चिनल के संरक्षण को लेकर आज इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल में मंथन किया गया. जनजातीय जिले लाहौल-स्पीति के कुछ इलाकों में बोली जाने वाली यह पौराणिक भाषा लुप्त होने के कगार पर है. चिनल पर संस्कृत का गहरा प्रभाव दिखता है. इसे संस्कृत भाषा परिवार की एक सदस्य के बतौर जाना-समझा जा सकता है. यह भाषा हिंदी से भी मिलती-जुलती है और इसका व्याकरण और शब्दकोष भी है. इस भाषा के संरक्षण में जुटे हुए लोगों का कहना है कि इस भाषा पर शोध होना जरूरी है.

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में 6 साल से हो रहा है शोध...

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