000

  |   Bareillynews

खुशी- अनसमझी, अनसुलझी, अनजानी, अनपहचानी शक्ति

काफी आम सी लगेगी पढ़ने में, पहले भी कई बार सुनी होगी परंतु शायद महसूस ना कर पाये हों। मैंने भी पहली बार महसूस की, इसलिए फिर से सुनी हुई बातें लिखने की इच्छा हुई। हकीकत है, पर रोमांचक कम लगेगी।

हमारे घर के चौकीदार की कहानी, एक गरीब किसान, मजदूर की कहानी, मध्य प्रदेश के महुआ के एक छोटे से गांव से आकर दिल्ली में रहने लगा। शादी हुई, दो बच्चे, खुशी और आनन्द, हुए। पति-पत्नी; सोमनाथ और उमा, दोनों मालिश का कार्य करते और बच्चों का लालन-पालन करते। दोनों बच्चे पास ही के एक प्राईवेट स्कूल में पढ़ने जाते, टयूशन जाते, स्कूल में अव्वल आते,। माह में एक-आध बार बच्चों से सुनने को मिलता, आंटी- आज मंगल बाजार जायेंगे। नये कपड़े लाएंगे, कुछ चाट पकोड़े भी खाकर आएंगे। बूढ़े मां बाप और छोटे भाई के लिए गांव में पैसे भी भेजता। उनका मोबाइल रिचार्ज करवाता। कभी-कभी तो सोमनाथ ऐसा एहसास देता था कि जैसे किसी मीडिल क्लास का बच्चा अमेरिका पहुंच गया हो। बेसमेंट में मच्छर बहुत होने के कारण, बच्चे अक्सर बीमार हो जाते थे। मन में कई बार आता कह दू कि सोमनाथ कोई छोटा सा कमरा किराये पर लेकर क्यूं नहीं रह लेते। फिर खुद ही जवाब मिल जाता अरे कमरा भी कोई इससे अच्छी जगह थोड़े ही ले पायेगा। कुल मिलाकर एक अनुभूति होती कि सब ठीक-ठाक चल रहा है, सिर्फ एक कमी कि काश सोमनाथ शराब पीनी छोड़ दे।...

यहां पढें पूरी खबर— - http://v.duta.us/XIYmwQEA

📲 Get Bareilly News on Whatsapp 💬