प्रकृति की पूजा और पर्यावरण की रक्षा करना जरूरी

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इंदौर. रूढि़वादियों में जकड़ा समाज उन्नति नहीं कर सकता। जो समाज समयानुकूल परिवर्तन करेगा, वही समाज और राष्ट्र आगे बढ़ सकता है। बहुत सारी वस्तुएं, मान्यताएं समयानुकूल नहीं रह जातीं, उनमें परिवर्तन करना बहुत जरूरी है। परिवर्तन ही विकास का मूल है।

माहेश्वरी महिला संगठन इंदौर जिला द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में व्यास पीठ पर विराजे संत रामप्रसाद ने रविवार को उक्त विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा, भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पूजा का संदेश देकर मानव जगत को प्रेरणा दी कि जड़ता को छोड़कर प्रकृति की पूजा व पर्यावरण की रक्षा करना बहुत जरूरी है। इससे ही मानव के स्वास्थ्य की रक्षा होगी। वृक्ष काटने, पर्वत हटाने और नदियों के खनन से प्रकृति को नुकसान हो रहा है। मनुष्य के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। वृक्ष काटने से हरियाली और ऑक्सीजन की कमी हो रही है। प्रदूषण से मनुष्य को श्वास लेना भी मुश्किल हो रहा है। स्वच्छता से व्यक्ति स्वस्थ रह सकता है, इसलिए भगवान श्रीकृष्ण ने स्वस्थ जीवन का संदेश दिया है। स्वच्छता अभियान में सभी लोग जुड़ें और प्रकृति की पूजा करें। गिरिराज गोवर्धन की लीला पर प्रवचन हुए। गोवर्धन को छप्पन भोग लगाया। व्यासपीठ का पूजन गिरधारीलाल शारदा, रूपेश भूतड़ा, चेतन नागोरी, पुष्पा मोलासरिया, दीप्ति भूतड़ा आदि ने किया।

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