ब्यासर में देवविधि से हुई देवता कुंबर दान नाग के मंदिर प्रतिष्ठा

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ब्यासर में देवता कुंबर दान मंदिर की प्रतिष्ठा

कार्यक्रम में आधा दर्जन देवी-देवताओं सहित सैकड़ों हारियानों और श्रद्धालुओं ने भरी हाजिरी

काष्ठकुणी शैली के मंदिर को बनाने में लगा दो सालों का समय

कुल्लू। ब्यासर के आराध्य देवता कुंबर दान नाग के नवनिर्मित मंदिर की प्रतिष्ठा देवविधि के साथ हुई। इस दौरान देवपरंपराओं का निर्वहन किया गया।

प्रतिष्ठा में ऊझी घाटी के देवता कालिया नाग शिरढ़, अजत नाग भलोगी, बाबा वीर नाथ डेहरासेरी, बाबा वीर नाथ बंदरोल, माता काली भगवती जोहल, शिल्लीहार के देवता नारायण, उश्लीधार के थान देवता ने भी सैकड़ों हारियानों के साथ शिरकत की। भव्य देवमिलन को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। देवता के दर्शन और भव्य मंदिर को देखने के लिए श्रद्धालु ब्यासर पहुंचे। मंदिर को काष्ठकुणी शैली में बनाया गया है। देवता कुंबर दान नाग के कारदार कमर चंद ने कहा कि माता फूंगणी व बाबा वीरनाथ के निमंत्रण पर कारज का भव्य आयोजन हुआ। कारदार ने कहा कि काष्ठकुणी शैली से निर्मित इस मंदिर के निर्माण को लगभग दो सालों का समय लगा। मंदिर निर्माण के कारीगर जीवानंद ने कहा कि देवी, देवताओं के आशीर्वाद से उन्होंने इस मंदिर को तैयार किया है। मंदिर का निर्माण कई देव नियमों में रहकर करना पड़ा। प्रतिष्ठा में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त किया। ग्रामीण मेहर चंद, भाग चंद, आलम चंद, ने कहा कि ग्रामीणों ने गांव में आने वाले श्रद्धालुओं की खूब आवभगत की। उन्होंने कहा कि तीन दिन तक चलने वाले इस कारज में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। गांव में उत्सव का माहौल रहा। देव कारज में अपनी भूमिका निभाने के बाद देवता अपने देवालय की ओर लौटे।

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