उम्मीद थी कि ठीक हो जाएगी आखें, ऑपरेशन हुआ तो पूरी चली गई रोशनी

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धार.

सरकारी योजना है तो आखों की परेशानी लेकर जिले भर के मरीज जिला अस्पताल पहुंचे। यहां से कई मरीजों को इंदौर के आई हास्पिटल भेजा गया। 8 अगस्त को राष्ट्रीय अंधत्व निवारण कार्यक्रम के तहत मोतियाबिंद का ऑपरेशन भी हुआ, लेकिन आखों से पट्टी हटने के बाद इन्हें कुछ नजर नहीं आया। परेशान मरीजों ने हल्ला मचाया तो इंदौर के सीएमएचओ ने तत्काल अस्पताल को सील करवा दिया और उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए। लेकिन सरकारी योजना का लाभ लेने के चक्कर में धार जिले के 10 मरीजों के आखों की रोशनी ही चली गई।

ऑपरेशन फेल होने से 11 मरीजों के आखों की रोशनी चली गई, जिनमें 10 मरीज धार जिले के बताए जा रहे हैं। लेकिन पुख्ता प्रमाण के लिए कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है। डॉक्टरों का कहना है कि पूरी जांच के बाद ही किसी तरह का बयान दिया जा सकता है। धार जिला अस्पताल में पदस्थ नैत्र सहायक शैलेंद्र तिवारी के अनुसार अस्पताल में करीब 17-18 मरीज आखों की परेशानी लेकर आए थे। इनकी जांच कर मोतियाबिंद का ऑपरेशन करवाने की सलाह दी। उन्हें राष्ट्रीय अंधत्व निवारण कार्यक्रम के तहत इंदौर में होने वाले ऑपरेशन के बारे में भी बताया गया। बावजूद 5 मरीजों ने जाने से इंकार कर दिया, वहीं 13 मरीज इंदौर के आई होस्पिटल भेजे गए थे। 8 अगस्त को इनका ऑपरेशन भी हुआ, लेकिन इनमें से कितने का ऑपरेशन फेल रहा और अब उनकी स्थिति क्या है इसके बारे में जांच रिपोर्ट से ही पता चल सकेगा। इंदौर से मिली खबर के अनुसार धार जिले के आहू गांव की रामी बाई के आखों की रोशनी पूरी तरह जा चुकी है, जिनका रो-रो कर बुरा हाल है।...

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