जातियों का गठजोड़ शुरू, विकास के मुद्दे गौण

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करौली. छात्रसंघ चुनाव की अधिसूचना जारी होने के साथ ही करौली के राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में चुनाव जीतने के लिए छात्र नेताओं जातियों का गठजोड़ बनाना शुरू कर दिया है। ऐसे में महाविद्यालय की समस्याओं और विकास के मुद्दे गायब है। करौली जिले के सबसे बड़े इस महाविद्यालय में चार हजार छात्र मतदाता है।

यहां का चुनाव जातियों के बीच ही सिमटा रहता है। इस कारण से छात्रसंघ चुनाव के दौरान विकास के मुद्दों पर कभी चर्चा नहीं की जाती है। सिर्फ जातियों के गठजोड़ के गणित की जुगत के आधार पर ही चुनाव जीता जाता है। इस कारण इस साल भी छात्र नेताओं ने जातिगत नेताओं की शरण में जाना शुरू किया है या जातियों के हिसाब से छात्रसंघ का पैनल उतारने की तैयारी शुरू की है। पूर्व छात्रनेता बताते है कि जिस छात्रसंघ अध्यक्ष का पैनल जातिगत आधार पर होता है वह ही चुनाव में सफल होता है। जानकार बताते है कि कॉलेज में एसटी, एससी वर्ग के छात्रों का गठजोड़ प्रभावी रहता है। लेकिन गत सालों से इस गठजोड़ में सेंध लग गई है। इसी का परिणाम है कि ओबीसी वर्ग से भी छात्रसंघ पद पर छात्र विजेता हुए हैं।...

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