...तो टूटे-फूटे रास्तों से कैसे कैलाश पहुंचेगी मां नंदा

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हिमालय क्षेत्र की आराध्य देवी मां नंदा इस बार टूटे-फूटे रास्तों से ही कैलाश के लिए विदा होंगी। 23 अगस्त से मां नंदा की लोकजात यात्रा शुरू होगी, लेकिन अतिवृष्टि से यात्रा मार्ग जगह-जगह क्षतिग्रस्त पड़ा हुआ है। अभी तक जिला प्रशासन और विकास खंड स्तर से यात्रा मार्ग के सुधारीकरण के लिए भी कोई कार्ययोजना तैयार नहीं की गई है।

प्रतिवर्ष सिद्घपीठ कुरुड़ से नंदा की लोकजात यात्रा शुरू होती है। कुरुड़ मंदिर से दशोली और बधाण क्षेत्र की मां नंदा की डोली कैलाश के लिए विदा होती है। इस बार 21 अगस्त को दशोली व बधाण की मां नंदा की डोली श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ कुरुड़ मंदिर परिसर में स्थापित की जाएगी। दो दिनों तक परिसर में रहने के बाद 23 को दोनों डोली विभिन्न पड़ावों से होते हुए नंदा अष्टमी को कैलाश के लिए विदा हो जाएगी। मां नंदा लोकजात यात्रा के प्रमुख पड़ाव कुरुड़ से उस्तोली, सरपानी, लांखी, भेंटी और स्यांरी-बंगाली गांवों में पैदल रास्ते कई जगहों पर क्षतिग्रस्त पड़े हुए हैं। कहीं-कहीं पैदल रास्तों में बरसाती गदेरे बह रहे हैं, लेकिन अभी तक जिला प्रशासन की ओर से नंदा लोकजात यात्रा मार्ग के सुधारीकरण का कार्य शुरू नहीं किया गया है। घाट क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने मां नंदा की लोकजात से पहले पैदल रास्तों की मरम्मत की मांग उठाई है। लांखी गांव के मोहन सती का कहना है कि वर्ष 2018 में नंदा लोकजात यात्रा के पैदल रास्तों के सुधारीकरण के लिए शासन से जिला पर्यटन विभाग को दस लाख की धनराशि दी गई थी, लेकिन कोई काम नहीं हुआ है। इधर, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी का कहना है कि घाट विकास खंड से पैदल रास्तों का प्रस्ताव मांगा गया है। जल्द ही रास्तों की मरम्मत कर ली जाएगी।

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