दिव्यांग सर्टिफिकेट के लिए आई मुक बधिर तो जाना पड़ा इंदौर

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धार.

नाक, कान और गले की परेशानी से प्रतिदिन कई मरीज आते हैं, लेकिन जिला अस्पताल में इस बीमारी से निजात दिलवाने वाला कोई डॉक्टर ही नहीं है। हालांकि सामान्य बीमारी पर मौजूद डॉक्टर दवाई देकर राहत पहुंचाने का प्रयास करते हैं, लेकिन बड़ी बीमारी पर उन्हें इंदौर रेफर कर दिया जाता है। शनिवार को भी बदनावर तहसील के टकरावदा गांव की मुक बधिर वंदना अपने पिता अविनाश पाटीदार के साथ दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने आई थी, लेकिन ईएनटी डॉक्टर नहीं होने के कारण सिविल सर्जन ने उन्हें इंदौर जांच के लिए भेज दिया।

सिविल सर्जन डॉ. एमके बौरासी का कहना है कि मुक बधिर के लिए दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाते समय डॉक्टरी जांच लगाना जरूरी होता है। धार जिला अस्पताल में ईएनटी डॉक्टर नहीं होने के कारण यवुती को इंदौर एमवाय अस्पताल भेजा गया है। वहां से डॉक्टरी पर्ची आने के बाद जिला अस्पताल में उसका प्रमाण पत्र बना दिया जाएगा। युवती के पिता अविनाश का कहना है कि उनकी बच्ची जन्म से ही ना तो सुन सकती है और ना ही उसके मुंह से आवाज निकलती है। मुक बधित होने के कारण उसे ६टी कक्षा से ही इंदौर के मुक बधिर स्कूल में भर्ती करवा दिया था, जो अब ग्रेज्युएट हो चुकी है। वंदना आटर््स से ग्रेज्युएशन कर अब वह आगे की पढ़ाई कर रही है।...

फोटो - http://v.duta.us/3qerawAA

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