👉आर्टिकल 370 के खत्म किए जाने पर गरमाई 👊राजनीति, किसी ने पक्ष में तो किसी ने विपक्ष में दिया🗣️ बयान

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देश के संविधान से अुच्छेद 370 हटाने के नरेंद्र मोदी सरकार के फैसले पर राज्यसभा में जमकर बहस हुई। इसके बाद वोटिंग में इस बिल को 61 के मुकाबले 125 वोट से पास कर दिया गया। बिल पर बहस में भाग लेने वाले ज्यादातर राजनीतिक दलों ने सरकार के इस फैसले का समर्थन किया है। वहीं कांग्रेस, डीएमके, सीपीआई और टीएमसी समेत कई विपक्षी दलों ने इसका विरोध किया है।

यहां देखें सिब्बल का टि्वट-http://v.duta.us/WShJAwAA

सदन में बिल पर चर्चा के दौरान सीनियर कांग्रेसी नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि, कि सरकार जोड़-तोड़ के जनादेश से इसे पास करा लेगी, लेकिन यह ऐतिहासिक है या नहीं यह तो इतिहास बताएगा। क्या यह संघीय ढांचे पर धब्बा था, यह फैसला इतिहास करेगा।

पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इसे असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक फैसला करार देते हुए कहा कि केंद्र सरकार इस मामले को संसद में ला सकती थी। इस पर एक अच्छी चर्चा हो सकती थी, दोनों सदन में दो तिहाई बहुमत होता तो आप संविधान में बदलाव कर सकते थे। इसके बाद आप चाहते तो धारा 370 और 35 A को हटा सकते थे।

भाजपा के संस्थापक सदस्यों में से एक लाल कृष्ण आडवाणी ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 पर हटाने पर मोदी सरकार के फैसले की सराहना की। उन्होने इस फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे जम्‍मू, कश्‍मीर और लद्दाख के विकास को बल मिलेगा। आडवाणी ने अपने बयान में आगे कहा कि मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को इस एतिहासिक पहल के लिए बधाई देता हूं। मैं जम्मू, कश्मीर और लद्दाख में शांति, विकास और शुखहाली के लिए प्रार्थना करता हूं।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। सरसंघचालक मोहन भागवत ने सरकार के इस फैसले को साहसपूर्ण कदम बताते हुए स्वागत किया है। आरएसएस प्रमुख की ओर से ट्विटर के जरिए जारी किए बयान में कहा गया है कि सरकार के साहसपूर्ण कदम का हम हार्दिक अभिनंदन करते हैं। यह जम्मू-कश्मीर सहित पूरे देश के हित के लिए अत्यधिक आवश्यक था। सभी को अपने स्वार्थों एवं राजनीतिक भेदों से ऊपर उठकर इस पहल का स्वागत और समर्थन करना चाहिये।

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