स्वयं हुए प्रकट स्वयंभू भोले नाथ: प्राकृतिक स्थल पर रोज शिवलिंग की पूजा-अर्चना से होती मनोकामना पूरी

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सुमावली. कस्बे से आठ किमी दूर घने जंगल में कपिलमुनि आश्रम की पहाड़ी की तलहटी में प्राकृतिक शिवलिंग मौजूद है। इस शिवलिंग के बारे में मान्यता है कि यह स्वयं प्रकट हुआ था। इसीलए इसे स्वयंभू भगवान भोलेनाथ के नाम से जाना जाता है। पहाड़ी की तलहटी में एक कुंड जिससे हमेशा पानी बहता रहता है। पास में ही एक गुफा भी है, लेकिन कोई इसमें घुस नहीं पाया। प्राचीन बरगद के पेड़ के नीचे स्थित भगवान स्वयंभू भोलेनाथ की लोग प्रतिदिन पूजा-अर्चना करते हैं, लेकिन सावन में खास तौर से यहां पूजा करने पहुंचते हैं।

सोमवार को पूजा-अर्चना का खासा महत्व है। महाशिवरात्रि पर यहां कांवडिय़ों का मेला भी लगता है और भक्त सोरों व हरिद्वार से गंगाजल लाकर अभिषेक करते हैं। मान्यता है कि प्राकृतिक और प्राचीन शिवलिंग का आकार हर साल एक चावल के बराबर बढ़ रहा है। इस पहाड़ी पर स्थित 4 वाय 4 केगड्ढे से वर्ष भर पानी निकलता रहता है। जो पंप लगाकर पानी खींचने के बावजूद खाली नहीं होता है।...

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