कश्मीर घाटी में👉 उर्दू बोलते नजर आएंगे 'भगवान राम'🙏

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लोकप्रिय गीत ‘सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा’ लिखनेवाले उर्दू के मशहूर शायर अल्लामा इकबाल भी भगवान राम को ‘इमाम-ए-हिंद’ कहते हैं और लिखते हैं- है राम के वजूद पे हिंदोस्तां को नाज, अहले नजर समझते हैं उसको इमामे हिंद। इकबाल के ‘इमाम-ए-हिंद’ भगवान राम अब उर्दू में नाट्य मंचन के जरिये कश्मीर घाटी में लोगों को शांति का सन्देश देंगे।

इस नए तरीके में राम अब उर्दू जुबान बोलते नजर आयेंगे, जिससे उनके शांति के संदेश सीधे कश्मीरियों के दिल में उतर सके। नवंबर माह से कश्मीर में शुरू होने जा रही इस कोशिश में जल्द ही देश के 100 अन्य प्रमुख शहरों को भी शामिल किया जायेगा। ‘इमाम-ए-हिंद: राम, सबके राम’ पुस्तक के लेखक मोहम्मद अलीम ने बताया कि राम के जीवन से जुड़े इन नाटकों का मंचन ऐसे समय में आयोजित किया जा रहा है, जब सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर मामले की सुनवाई चल रही है।

मोहम्मद अलीम ने अमर उजाला को बताया कि यह पुस्तक उर्दू भाषा में नाट्य शैली में लिखी गई है। शेक्सपिरियन स्टाइल में उर्दू में लिखी राम से जुड़ी इस तरह की यह पहली साहित्यिक कोशिश है। इसमें वाल्मीकि रामायण से लेकर आज तक के राम से जुड़े सभी प्रमुख ग्रंथों के तथ्य जुटाए गये हैं। इस पुस्तक में उर्दू के कवियों के लिखे राम गीतों को भी शामिल किया गया है। इनमें द्वारका प्रसाद, ब्रज नारायण और अल्लामा इकबाल शामिल हैं। इस तरह यह एक गायन नाट्य कला से मिश्रित मंचन होगा, जो आम लोगों की जुबान में होगा जिससे इसके भाव सीधे लोगों तक पहुंच सकें।

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